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आज का दिन महान है!



1. आज वही दिन है जिसे यहोवा ने बनाया है; मैं इसमें मग्न और आनन्दित हूँ।

2. आज का दिन फलदायी है और मैं अपने कार्यों में उन्नति करता हूँ।

3. आज मैं पवित्र आत्मा के साथ संगति में चलता हूँ।

4. आज मैं पवित्र आत्मा की अगुवाई में चलता हूँ।

5. आज मेरा ध्यान परमेश्वर द्वारा मुझे सौंपे गए कार्य को पूरा करने पर लगा है।

6. आज मैं क्षमा करने और हर परिस्थिति में प्रेम से चलने का चुनाव करता हूँ।

7. आज मैं अपना स्वभाव और मनोवृत्ति उत्तम बनाए रखने का चुनाव करता हूँ।

8. आज मैं परमेश्वर के जीवन को दूसरों तक पहुँचाने वाला, स्वर्ग की सुगन्ध फैलाने वाला, परमेश्वर की धार्मिकता को प्रकट करने वाला और उसके स्वभाव को दर्शाने वाला हूँ।

9. आज मैं विश्वास से जीवन जीता हूँ।

10. आज मैं परमेश्वर के वचन में और भी गहराई तक प्रवेश करता हूँ।

11. आज मैं जहाँ कहीं जाता हूँ, वहाँ आशीष का कारण बनता हूँ। मेरे मुख से प्रशंसा, कृतज्ञता, आशा और करुणा के वचन निकलते हैं, और मैं लोगों को आर्थिक रूप से भी आशीष देता हूँ।

12. आज मैं अपनी सारी आशाओं और अपेक्षाओं के लिए अपनी दृष्टि यीशु पर लगाए रखता हूँ, क्योंकि मेरी सारी आशा केवल उसी से है।

13. आज मैं अपना समय निष्फल कार्यों में व्यर्थ नहीं करता।

14. आज मैं चुगली करने वालों और विद्रोही स्वभाव के लोगों की संगति करने से इनकार करता हूँ। मैं उन लोगों की संगति में लगातार रहने की अपेक्षा अकेले रहना पसन्द करता हूँ, जिनके मन में मेरे पिता परमेश्वर के प्रति श्रद्धा नहीं है।

15. आज मैं परमेश्वर की बुद्धि में चलता हूँ।

16. आज मैं प्रभु के आनन्द में चलता हूँ; इसलिए मैं बलवन्त हूँ।

17. आज मैं यीशु के साथ संगति में उत्तम और सार्थक समय बिताता हूँ।

18. आज मैं अपने जीवन और उससे सम्बन्धित हर क्षेत्र के ऊपर परमेश्वर के विजय के वचन की घोषणा करता हूँ।

19. आज मैं खराई, धार्मिकता और न्याय के मार्ग पर चलता हूँ।

20. आज मैं जो कुछ भी करता हूँ, प्रभु उसमें मुझे सफल करता है।

21. आज मैं पवित्रता के मार्गों पर चलता हूँ, क्योंकि पवित्रता के बिना कोई प्रभु को नहीं देखेगा।

22. आज मैं देने वाला हूँ और अपनी धन-सम्पत्ति के द्वारा प्रभु का आदर करता हूँ। मैं उसकी देह अर्थात् कलीसिया के लिए आशीष का कारण हूँ।

23. आज मैं अपनी देह को परमेश्वर के लिए जीवित बलिदान करके अर्पित करता हूँ। मैं अपने शरीर के प्रत्येक अंग को परमेश्वर के हाथों में धार्मिकता के हथियार के रूप में सौंपता हूँ।

24. आज मैं अपने चरवाहे की वाणी सुनता और उसके पीछे चलता हूँ। वह मुझे हरी-हरी चराइयों में बैठाता है और सुखदायी जल के झरनों के पास ले चलता है।

25. आज मैं पिता के प्रेम के प्रकाशन में बढ़ता हूँ।

26. आज मैं अनुग्रह में और अपने प्रभु यीशु के ज्ञान में बढ़ता हूँ।

27. आज मैं जीवन की चुनौतियों को धीरज से सहता हूँ और अपने विश्वास के अंगीकार को दृढ़ता से थामे रहता हूँ। मैं हार मानने से इनकार करता हूँ। मैं पीछे नहीं हटूँगा, क्योंकि मैं जानता हूँ कि परमेश्वर ने जो प्रतिज्ञा की है, वह उसे मेरे जीवन में पूरा करेगा।

28. आज सताव, चुनौतियाँ, लोगों के विचार और उनकी बातें मुझे विचलित नहीं कर सकतीं। मैं अपने प्राण को भी अपने लिए प्रिय नहीं समझता, ताकि आनन्द के साथ अपनी दौड़ पूरी कर सकूँ और उस सेवकाई को पूरा कर सकूँ जो मैंने प्रभु यीशु से प्राप्त की है।

29. आज मैं यीशु मसीह के पुनरुत्थान का गवाह हूँ।

30. आज प्रभु ने मुझे धन-सम्पत्ति उत्पन्न करने की सामर्थ्य दी है। इसलिए धन और सम्पत्ति मेरे जीवन में बढ़ते हैं। मुझे कभी किसी भली वस्तु की घटी नहीं होगी, क्योंकि प्रभु की आशीष मुझे धनी बनाती है और वह उसके साथ कोई दुःख नहीं जोड़ता।

31. आज मैं शिकायत करने से इनकार करता हूँ। मैं कुड़कुड़ाने और दोष लगाने से इनकार करता हूँ। मैं कृतज्ञ होने का चुनाव करता हूँ। मैं धन्यवाद देने का चुनाव करता हूँ। हे प्रभु, तेरा धन्यवाद हो!

32. आज जो कुछ भी मेरे मुख में जाता है, वह परमेश्वर के वचन और प्रार्थना के द्वारा पवित्र किया जाता है। वह मेरी देह को सामर्थ्य प्रदान करता है, ताकि मैं अपने पिता की सेवा उत्तमता के साथ कर सकूँ।

33. आज मैं अपने हर कार्य में प्रभु को स्वीकार करता हूँ और पूरे दिन उसे महिमा देता हूँ।

34. आज मैं इस संसार के बुरे प्रभावों, बुरे कामों और बुरी मनोवृत्तियों को अपने मन को अशान्त करने या अपने ध्यान को भटकाने नहीं देता।

35. आज मेरा मन प्रभु पर स्थिर है और मेरा ध्यान उसके वचन पर लगा हुआ है। प्रभु मुझे पूर्ण शान्ति में बनाए रखता है।

36. आज मैं दिव्य स्वास्थ्य में चलता हूँ। कोई बीमारी, कोई रोग और शैतान का कोई विषाणु मेरे विरुद्ध फल-फूलकर प्रबल नहीं हो सकता।

37. आज मैं प्रभु पर भरोसा रखता हूँ और बदला लेने से इनकार करता हूँ।

38. आज का दिन महान है, क्योंकि यही वह दिन है जिसे यहोवा ने बनाया है; मैं इसमें मग्न और आनन्दित हूँ।

39. आज का दिन विजय, जयवन्तता और अपार समृद्धि का दिन है। आज का दिन महान है!

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