मैं वही हूँ जो परमेश्वर कहता है कि मैं हूँ!

1. मैं परमेश्वर की संतान हूँ। (गलातियों 3:26)
2. मैं मसीह में हूँ। (1 कुरिन्थियों 1:30)
3. मैं मसीह में नई सृष्टि हूँ। (2 कुरिन्थियों 5:17)
4. मैं मसीह में परमेश्वर की धार्मिकता हूँ। (2 कुरिन्थियों 5:21)
5. मैं मसीह में स्वर्गीय स्थानों में हर एक आत्मिक आशीष से आशीषित हूँ। (इफिसियों 1:3)
6. मैं मसीह में जगत की उत्पत्ति से पहिले परमेश्वर का चुना हुआ हूँ। (इफिसियों 1:4)
7. मैं यीशु मसीह में पवित्र और निर्दोष ठहराया गया हूँ। (इफिसियों 1:4)
8. मैं प्रिय में ग्रहण किया गया हूँ। (इफिसियों 1:6)
9. मुझे यीशु के लहू से छुटकारा मिला है। (इफिसियों 1:7)
10. मैं अपने सब पापों की क्षमा उसके अनुग्रह की धन-सम्पत्ति से पा चुका हूँ। (इफिसियों 1:7)
11. मैंने मसीह में मीरास पाई है; इसलिये मैं धनी हूँ। (इफिसियों 1:11)
12. मैं प्रतिज्ञा किए हुए पवित्र आत्मा से छाप दिया गया हूँ। (इफिसियों 1:14)
13. मैं महिमा का पुत्र हूँ। (इफिसियों 1:17)
14. मैं परमेश्वर का प्रिय हूँ। (इफिसियों 2:4)
15. मैं परमेश्वर की कृति हूँ, मसीह यीशु में भले कामों के लिये सृजा गया हूँ, जिनको परमेश्वर ने पहिले से ठहराया कि मैं उनमें चलूँ। (इफिसियों 2:10)
16. मुझे यीशु मसीह के द्वारा पवित्र आत्मा में पिता तक पहुँच है। (इफिसियों 2:18)
17. मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूँ; अब मैं जीवित नहीं, पर मसीह मुझ में जीवित है; और जो जीवन मैं शरीर में जीता हूँ, वह परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास से जीता हूँ जिसने मुझसे प्रेम किया और अपने आप को मेरे लिये दे दिया। (गलातियों 2:20)
18. मैं मसीह के साथ जिलाया गया हूँ, मसीह के साथ उठाया गया हूँ और मसीह यीशु में स्वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया गया हूँ। (इफिसियों 2:6)
19. मसीह मुझ में है, महिमा की आशा। (कुलुस्सियों 1:27)
20. जो मुझ में है, वह उस से बड़ा है जो जगत में है। (1 यूहन्ना 4:4)
21. मैं पवित्र आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवास स्थान हूँ। (इफिसियों 2:22)
22. मसीह मेरा ज्ञान है। (1 कुरिन्थियों 1:30)
23. मसीह मेरी धार्मिकता है। (1 कुरिन्थियों 1:30)
24. मसीह मेरा पवित्रीकरण है। (1 कुरिन्थियों 1:30)
25. मसीह मेरा छुटकारा है। (1 कुरिन्थियों 1:30)
26. मैं वचन का सुनने वाला ही नहीं, पर उसका करने वाला भी हूँ। (याकूब 1:22)
27. प्रभु का आत्मा मुझ पर है और मैं अभिषिक्त हूँ। (लूका 4:18)
28. मैं पृथ्वी का नमक हूँ। (मत्ती 5:13)
29. मैं जगत की ज्योति हूँ। (मत्ती 5:14)
30. मैं यीशु मसीह पर विश्वास करने से धर्मी ठहराया गया हूँ। (गलातियों 2:16)
31. मैं व्यवस्था के श्राप से छुटकारा पाया हूँ और मसीह में अब्राहाम का आशीर्वाद मुझ पर है। (गलातियों 3:13–14)
32. मैं मसीह में बपतिस्मा लिया हूँ और मैंने मसीह को धारण किया है। (गलातियों 3:27)
33. मैं मसीह में अब्राहाम का वंश हूँ। (गलातियों 3:29)
34. मैं आत्मा में चलता हूँ और शरीर की अभिलाषाओं को पूरा नहीं करता। (गलातियों 5:16)
35. मैं पवित्र आत्मा से चलाया जाता हूँ; मैं आत्मा में जीता हूँ और आत्मा में चलता हूँ। (गलातियों 5:25)
36. मैं मसीह का हूँ और मैंने शरीर को उसकी अभिलाषाओं और लालसाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है। (गलातियों 5:24)
37. मैं प्रभु में और उसकी शक्ति के सामर्थ्य में बलवन्त हूँ। (इफिसियों 6:10)
38. परमेश्वर के सारे हथियार मुझ पर हैं और मैं शैतान की युक्तियों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम हूँ। (इफिसियों 6:11)
39. मैं मसीह में पवित्र जन हूँ। (फिलिप्पियों 1:1)
40. मेरे लिये जीवित रहना मसीह है और मरना लाभ है। (फिलिप्पियों 1:21)
41. क्योंकि परमेश्वर ही मुझ में अपनी इच्छा और अपनी प्रसन्नता पूरी करने के लिये कार्य कर रहा है। (फिलिप्पियों 2:13)
42. मैं पीछे की बातें भूलकर आगे की ओर बढ़ता हूँ। (फिलिप्पियों 3:13)
43. मैं लक्ष्य की ओर बढ़ता हूँ, परमेश्वर के उस इनाम के लिये जो मसीह यीशु में ऊपर बुलाने से मिलता है। (फिलिप्पियों 3:14)
44. मैं मसीह के द्वारा सब कुछ कर सकता हूँ जो मुझे सामर्थ्य देता है। (फिलिप्पियों 4:13)
45. पिता ने मुझे अंधकार के अधिकार से छुड़ाया है और अपने प्रिय पुत्र के राज्य में पहुँचाया है। (कुलुस्सियों 1:13)
46. मैं उसी की प्रभावशाली शक्ति के अनुसार कार्य करता हूँ जो मुझ में सामर्थ्य के साथ काम करती है। (कुलुस्सियों 1:29)
47. मैं परमेश्वर के स्वभाव का भागी हूँ। (2 पतरस 1:4)
48. मैं उसकी इच्छा की पूरी पहचान से, सब प्रकार की आत्मिक समझ और बुद्धि से भरपूर हूँ। (कुलुस्सियों 1:9)
49. मैं प्रभु के योग्य चलता हूँ, सब प्रकार से उसको प्रसन्न करता हूँ, हर भले काम में फलवन्त होता हूँ, और परमेश्वर की पहचान में बढ़ता जाता हूँ; और उसकी महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ्य से बलवन्त होता हूँ। (कुलुस्सियों 1:10–11)
50. मैं मसीह में पूर्ण हूँ, जो सब प्रधानता और अधिकार का सिर है। (कुलुस्सियों 2:10)
51. मैं मसीह के साथ उठाया गया हूँ, इसलिये ऊपर की वस्तुओं को ढूँढ़ता हूँ जहाँ मसीह परमेश्वर की दाहिनी ओर बैठा है। मैं अपनी मनःस्थिति पृथ्वी की नहीं, वरन् ऊपर की वस्तुओं पर लगाता हूँ। क्योंकि मैं मर चुका हूँ और मेरा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है। (कुलुस्सियों 3:1–3)
52. मसीह मेरा जीवन है। (कुलुस्सियों 3:4)
53. मैं नये मनुष्यत्व को धारण करता हूँ, जो ज्ञान में उसके स्वरूप के अनुसार नया बनता जाता है जिसने मुझे सृजा। (कुलुस्सियों 3:10)
54. परमेश्वर की शान्ति मेरे हृदय पर राज्य करती है। (कुलुस्सियों 3:15)
55. मसीह का वचन मुझ में अधिकता से वास करता है। (कुलुस्सियों 3:16)
56. मेरी वाणी सदा अनुग्रह सहित और नमक से सजी हुई होती है, ताकि मैं हर एक को उचित रीति से उत्तर दे सकूँ। (कुलुस्सियों 4:6)
57. मैं बुद्धिमानी से चलता हूँ, समय को बहुमूल्य जानकर उसका सदुपयोग करता हूँ। (कुलुस्सियों 4:5)
58. मैं सब कुछ में सिद्ध और परमेश्वर की इच्छा में पूरा ठहरता हूँ। (कुलुस्सियों 4:12)
59. मैं वचन को मानता हूँ और वह वचन मुझ में सामर्थ्यपूर्वक कार्य कर रहा है। (1 थिस्सलुनीकियों 2:13)
60. मेरा प्रेम अपने भाइयों और सब मनुष्यों के प्रति बढ़ता और भरपूर होता जाता है। (1 थिस्सलुनीकियों 3:12)
61. मैं अशुद्धता के लिये नहीं, पर पवित्रता के लिये बुलाया गया हूँ। (1 थिस्सलुनीकियों 4:7)
62. मैं ज्योति का पुत्र हूँ, मैं दिन का पुत्र हूँ। (1 थिस्सलुनीकियों 5:5)
63. मेरा विश्वास अत्यन्त बढ़ रहा है और एक-दूसरे के प्रति मेरा प्रेम भरपूर हो रहा है। (2 थिस्सलुनीकियों 1:3)
64. यीशु का नाम मुझ में महिमा पाता है और मैं उसमें महिमा पाता हूँ, हमारे प्रभु यीशु मसीह की अनुग्रह के अनुसार। (2 थिस्सलुनीकियों 1:12)
65. मैं पुनरूत्थान शक्ति का धारक और पात्र हूँ।
66. मैं पवित्र आत्मा द्वारा अपने भीतरी मनुष्यत्व में सामर्थ्य से बलवन्त हूँ।
67. मसीह मुझ में है, इसलिये मेरी देह पाप के कारण मरी हुई है, और मेरी आत्मा धार्मिकता के कारण जीवित है। (ज़ोए) (रोमियों 8:10)
68. मैं मसीह में जीवन देने वाली आत्मा हूँ। जहाँ कहीं मैं जाता हूँ, परमेश्वर का जीवन बाँटता हूँ। परमेश्वर का जीवन मुझ में कार्य करता है, मेरे लिये कार्य करता है और मेरे द्वारा कार्य करता है। मरे हुए जीवित होते हैं, टूटी हुई वस्तुएँ सुधारी जाती हैं, रोग चंगे होते हैं, लोग स्वतंत्र होते हैं, मरुभूमि बगीचा बन जाती है, उचित द्वार खुलते हैं, परमेश्वर की महिमा प्रगट होती है, जीवन बदल जाते हैं और यीशु महिमा पाता है। (1 कुरिन्थियों 15:45)
69. मैं मसीह की सुगन्ध हूँ, मैं जीवन की सुगन्ध हूँ। (2 कुरिन्थियों 2:14–16)
70. परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो सदा मुझे मसीह में जय दिलाता है और मेरे द्वारा हर जगह अपने ज्ञान की सुगन्ध फैलाता है। (2 कुरिन्थियों 2:14–16)
71. परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मुझे हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा विजय देता है। (1 कुरिन्थियों 15:57)
72. मैं अनुग्रह से सन्तुष्ट और यहोवा की आशीष से परिपूर्ण हूँ। (व्यवस्थाविवरण 33:23)
73. वास्तव में मैं यहोवा के आत्मा से सामर्थ्य से परिपूर्ण हूँ।
74. मुझ में उत्कृष्टता की आत्मा है, इसलिये मैं हर काम में उत्तमता प्रगट करता हूँ।
75. मैं परमेश्वर की शक्ति से जीवन जीता हूँ।
76. बड़े सामर्थ्य से मैं यीशु मसीह के पुनरुत्थान की गवाही देता हूँ।
77. मसीह में मेरा जीवन निरन्तर हर्षोल्लास का उत्सव है, क्योंकि पिता मुझे सदा जयमालाओं में लिए चलता है।
78. मैं मसीह की पर्याप्तता में आत्मनिर्भर हूँ।
79. मैं उत्तम बातें कहता हूँ, और मेरे मुख से सच्चाई निकलती है; दुष्टता मेरे होंठों से घृणा की वस्तु है। मेरे सब वचन धर्म से भरे हैं, उन में कुछ टेढ़ा और टेढ़ापन नहीं। (नीतिवचन 8:6–8)
80. मैं भस्म करने वाली अग्नि के साथ रहता हूँ और सदा की जलनियों के साथ निवास करता हूँ। मैं धर्म से चलता हूँ और सीधी बातें बोलता हूँ। मैं उत्पीड़न के लाभ से घृणा करता हूँ और रिश्वत को अस्वीकार करता हूँ। मैं अपने कानों को हिंसा से और आँखों को बुराई से दूर रखता हूँ। इसलिये मैं ऊँचाई पर वास करता हूँ; मेरा शरणस्थान चट्टानों का गढ़ है। मुझे रोटी दी जाएगी और मेरा जल निश्चय है। हलेलूयाह! (यशायाह 33:14–16)
81. परन्तु मैं परमेश्वर के भवन में हरे जैतून के वृक्ष के समान हूँ; मैं सदा-सर्वदा परमेश्वर की करुणा पर भरोसा रखता हूँ। (भजन 52:8)
82. मैं तेरा धन्यवाद सदा करूँगा, क्योंकि तू ने यह किया है। और तेरे भक्तों के सामने मैं तेरे नाम की बाट जोहूँगा, क्योंकि वह भला है। (भजन 52:9)
83. मैं परमेश्वर के सामने सदा उत्तम विवेक के साथ जीवन जीता हूँ।
84. मेरा विवेक सदा परमेश्वर और मनुष्यों के प्रति अपराधरहित रहता है।
85. मेरा विवेक शुद्ध है और मैं उसी से अपने प्रभु की सेवा करता हूँ।
86. मैं परमेश्वर के जीवन का प्रसारक हूँ।
87. मैं परमेश्वर की आत्मा का प्रसारक हूँ – जीवित परमेश्वर की आत्मा मुझ में इतनी भर जाती है कि मेरे जीवन से चमकती है और जैसे प्रभु यीशु के द्वारा हुआ, वैसे ही उस दिव्य जीवन का प्रमाण और प्रगटीकरण औरों को मिलता है।